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Saturday, April 8, 2017

शहर

शहर में शहर रहता है
शहर में सिर्फ शहर होता है
हर शहर का अपना वजूद है
उसका अपना वजूद, अपने होने से

चिरई-चुरगुन, तालाब-बांधा, मर-मैदान
गुड़ी-गउठान, पारा-मुहल्ला
बाबू-नोनी, रिश्ते-नाते
शाम-ओ-सहर सब
या समाहित या शहर बदर
अब शहर में बस शहर ही शहर

7 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन मंगल पाण्डेय और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  2. वाह दिल को छू लेने वाली पोस्ट ...

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  3. बहुत बढ़िया सर, दो पंक्तियां पेश हैं
    शहर के डगर-डगर पर
    शहर-शहर है हमसफर

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